संवाद में विनम्रता से खुलती हैं तरक्की की राहें

दिनेश पाठक

बात दो दिन पुरानी है| व्हाट्सएप पर एक सन्देश आया..हाय सर। मैंने लिखा-यस प्लीज। उधर से जवाब आया-मुझे किसी ने आपका नम्बर दिया है। कहा गया है कि आप नौकरी दिलवाने में मददगार हो सकते हैं।

मैंने लिखा-आप कौन हैं? कहाँ से लिख रहे हैं या लिख रही हैं? आप की शैक्षिक योग्यता क्या है? अपने बारे में कुछ बताएँ, यह भी जानकारी दें कि किसके माध्यम से आप मुझे लिख रहे हैं?

जो जवाब आया, उससे मैं खुद भौचक रह गया। डिजिटल संवाद की अगली लाइन थी-आपने पूछा ही नहीं-बाई द वे, आई एम मनोज।

मैंने मनोज जी से स्पष्ट कहा-मैं नौकरी नहीं दिलवा सकता| हाँ, काउंसलर के रूप में रास्ता बता सकता हूँ| चलना आपको होगा| पढ़ना आपको होगा| अमल आपको करना होगा| मेरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ आपको रास्ते की जानकारी देने की है और मैं सटीक जानकारी तभी दे पाऊंगा, जब आपके बारे में जानूँगा| खैर, मुझसे जो संभव था, मैंने किया| मेरे लिए मनोज केवल उदाहरण है| ऐसे अनेक युवा आए दिन संपर्क करते हैं और बिना परिचय दिए, बिना अपने बारे में कोई जानकारी दिए, मुझसे सब कुछ हासिल कर लेना चाहते हैं|

इस सूरत के बावजूद मैं ऐसा मानता हूँ कि हमारे देश का युवा ज्यादा होशियार है। चपल है। पुरानी पीढ़ी से कहीं ज्यादा अच्छा सोचता-समझता है, पर मनोज जैसा संवाद होने पर निराशा तो होती है| इस घटना का उल्लेख करने के पीछे मेरी मंशा मनोज या उसकी तरह का व्यवहार करने वाले किसी भी युवा की कमी खोजना नहीं है| केवल ध्यान दिलाना है| सचेष्ट करना है कि अगर आपको किसी से मदद चाहिए आपका व्यवहार उसके प्रति कैसा होना चाहिए? यह घटना बहुत कुछ सीख देती है। संभव है कि मनोज किसी परेशानी में हों| संभव है कि वे जल्दबाजी में हों| संभव है कि उनके लिए तरक्की के सभी रास्ते बंद हो गए हों, तब भी उन्हें ऐसा लिखने या कहने से बचना होगा|

अगर आप को किसी से कुछ चाहिए तो विनम्रता पहली शर्त है। यह तब और जरुरी है, जब सामने वाला आपके बारे में कुछ नहीं जानता। आप भी उसके बारे में कुछ नहीं जानते अलावा इसके कि आपके किसी जानने वाले ने आपको एक नंबर दे दिया। ऐसे में किसी नौजवान की भूमिका क्या होनी चाहिए। मैं केवल इसी बिंदु पर अपनी बात रखने का प्रयास कर रहा हूँ। सहमति/ असहमति हो सकती है।

देश में बेरोजगारों की संख्या बहुत बड़ी है| आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है| नौकरियों के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। अमीर-गरीब के बीच खाई तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में नौजवान को बहुत संवेदनशील होना है। हमें अपनी अप्रोच दुरुस्त करनी है।

मैं अगर मनोज की जगह पर होता तो हाय सर लिखने के तुरंत बाद अपना नाम, शैक्षिक योग्यता, अनुभव, अपने शहर या गाँव का नाम लिखता। फिर जिन सज्जन से नंबर मिला, उनका नाम लिखता। उसके बाद नौकरी की बात करता। मिलने का समय मांगता। क्योंकि आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे के बारे में जानना बेहतर होता है। इसके बाद अगर सामने वाला मेरी कोई भी मदद करने की स्थिति में होता तो जरुर करने का प्रयास करता। अगर मुझसे सहमत होता और तुरंत जगह नहीं भी होती तो कहीं और भेज देता या फिर कुछ दिन बाद दोबारा मिलने के लिए कहता। पर, मनोज ने केवल अपना नाम बता इतिश्री कर ली।

मेरी नजर में किसी भी नौजवान के लिए यह उचित कदम नहीं हो सकता। ध्यान यह रखना है कि काम आपको चाहिए तो अपने बारे में आपको ही बताना पड़ेगा। तभी तो सामने वाला कुछ फैसला ले पाएगा। देश की युवा पीढ़ी से मेरी विनती है कि अगर आपको किसी से कुछ भी पाना है तो पहले उसे अपने बारे में जरुर बताएँ। वो कहते हैं न-फर्स्ट इम्प्रेशन इस लास्ट इम्प्रेशन। कृपया मनोज की तरह न लिखें। हो सकता है कि मनोज बहुत योग्य हो। बातचीत बहुत अच्छा करते हो। किन्हीं हालातों से उनके पास आज नौकरी न हो इसलिए वह ऐसा व्यवहार अनजाने में कर गए हों लेकिन सामने वाला जब आपके बारे में कुछ भी नहीं जानता तो उसे स्वप्न तो नहीं आएगा। बताना खुद को ही पड़ेगा।

यूँ भी देश में बेरोजगारी के बीच अच्छे लोगों की कमी बनी हुई है। जिनके पास ज्ञान है, समझ है, शिक्षा है, उनके सामने दिक्कतें न के बराबर हैं। मैं सार्वजनिक जीवन में अपने अपने लम्बे तजुर्बे के आधार पर कह सकता हूँ कि हर टीम लीडर को काम करने वाले लोग ही पसंद हैं।

मेरी युवा दोस्तों से विनती है कि किसी से कुछ पाने के लिए विनम्र भाव रखें| ज्ञान का ओछा प्रदर्शन न करें| कम शब्दों में अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने की आदत डालें| सुनने की कला विकसित करें| कुछ लिखने का मन कर रहा है तो पहले उस विषय पर ठीक से पढ़ें| बात बनेगी| आप जो चाहते हैं, सब मिलेगा| कोई रोक नहीं पाएगा|

(लेखक सीनियर जर्नलिस्ट, करियर काउंसलर एवं लाइफ कोच हैं)