मजबूत इच्छाशक्ति, नॉलेज है तो नौकरियों की कमी नहीं

इस समय अपने देश में 12 करोड़ से ज्यादा बेरोजगार हैं। ये आंकड़े उस शोर को पुख्ता करते हैं, जिसमें नौकरियों की कमी की बातें फ़िज़ा में तैर रही हैं। इसके विपरीत कारपोरेट हाउसेज इस बात से परेशान हैं कि उन्हें अच्छे लोग नहीं मिल पा रहे हैं। वे कैम्पस प्लेसमेंट ड्राइव के हवाले से ऐसी जानकारियां शेयर कर रहे हैं।

इन कंपनियों के प्रतिनिधि कहते हैं कि वे जब किसी कैम्पस में दो सौ लोगों की भर्ती का टास्क लेकर जाने की तैयारी करते हैं तब कॉलेज का दावा होता है कि वहां दो हजार युवा मौजूद मिलेगा| इस दावे के साथ ही स्टूडेंट्स के रजिस्ट्रेशन के आंकड़े भि कॉलेज देते हैं| और जब हम मौके पर पहुँचते हैं तो मिलते हैं चार सौ या पांच सौ। हमारे सपने वहीं धूल-धूसरित हो जाते हैं। तय है कि चार-पांच सौ में से दो सौ को तो सेलेक्ट करना बहुत मुश्किल टास्क है| 40-50 का आंकड़ा भी कई बार हम नहीं छू पाते। ऐसे में 150 नौकरियाँ वापस लेकर चले जाते हैं| अगर हम इन बातों पर गौर करें तो पता चलता है कि नौकरियाँ हैं, युवा भी हैं लेकिन या तो वे इम्तहान फेस नहीं करना चाहते या फिर उन्हें दिन में सपने आ रहे हैं कि नौकरी घर चलकर आएगी। मेरा मानना है कि ऐसा कभी नहीं होगा।

हमें अपनी समस्याओं से खुद जूझना होगा। खुद को रोज अपग्रेड करना होगा। किसी भी इम्तहान के लिए हरदम तैयार करना / रहना होगा। ठीक उसी तरह जैसे हमारे देश के जवान शांतिकाल में भी युद्ध के लिए खुद को रोज तैयार करते हैं| जीवन भी एक इम्तहान है। ध्यान देना जरूरी है कि जब आप पहली दफा स्कूल गए थे, तब भी इम्तहान दिया था। फिर वीकली टेस्ट, मंथली टेस्ट, क्वॉर्टरली टेस्ट, सिक्स मंथली टेस्ट और सालाना इम्तहान। अगर हम किसी भी ग्रेजुएट की बात करें तो कम से कम वह इसी प्रक्रिया से 17-18 वर्ष लगातार गुजरता है फिर अचानक नौकरी के मौके पर गायब रहने से दो ही संकेत मिलते हैं। या तो आप को इम्तहान से डर लगता है या फिर आप ने मान लिया है कि नौकरी खुद से चलकर आएगी।

पर, सच से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हमें खुद को ठीक उसी तरह तैयार करना होगा, जिस तरह अब तक करते रहे। अगर आपने हर क्लास अपनी तैयारियों से पास करते हुए यहाँ तक पहुँच गए हैं तो कोई कारण नहीं है कि आप इस इम्तहान में फेल हो जाएं। खुद पर भरोसा करते हुए नौकरी के लिए कॉलेज या विश्वविद्यालय में जितने भी मौके मिलें, उसे लपककर लेने की जरूरत है। आप जरूर कामयाब होंगे। बस ध्यान रखना है कि कोर्स के अलावा नौकरी का इम्तहान देते समय कई और छोटी-छोटी चीजें मैटर करती हैं।

मसलन, आपने कपड़े सलीके से पहने हैं या नहीं? बाल ठीक हैं या उलझे बालों के साथ ही आप इंटरव्यू के लिए पहुँच गए। विषय के अलावा मौजूदा समय में आने वाली चुनौतियों को आप कैसे देखते हैं?

आपका एटीट्यूड, अपनी बात कहने का तरीका कैसा है? आप प्रॉब्लम साल्विंग हैं या क्रिएटिंग? ये सारी चीजें आपकी कामयाबी का रास्ता खोलती हैं। अगर इन बातों पर आपने ध्यान दिया तो दुनिया की कोई ताकत आपको कामयाब होने से रोक नहीं पाएगी। अगर ऐसा हुआ तो कई फायदे होंगे। एक-देश के 12 करोड़ बेरोजगारों में से आपका नाम कट जाएगा। दो-कंपनियों को आप जैसा होनहार साथी मिल जाएगा। तीन-आप देश की तरक्की में सीधे अपनी भागीदारी निभा पाएँगे। चार-आप और आपके परिवार के जीवन में खुशहाली आएगा। अब तय आपको करना है कि असल में आप क्या चाहते हैं। खुशहाली या बदहाली। मुझे लगता है कि आपका जवाब होगा-खुशहाली। अगर आपका जवाब वाकई यही है तो उठिए, भागिए और यह दौड़ तब तक न बंद करिए जब तक आपकी मंजिल मिल न जाए।

स्वामी विवेकानंद जी ने भी तो कहा है-उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए|

-लेखक वरिष्ठ पत्रकार, करियर, पैरेंटिंग, चाइल्ड काउंसलर एवं भावी पीढ़ी के विकास पर केन्द्रित अभियान ‘बस थोड़ा सा’ के प्रमुख हैं|

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