कन्फ्यूजन दूर करने में मददगार है साइकोमेट्रिक टेस्ट

दिनेश पाठक

बात दो दिन पुरानी है| मुझे सुरभि का एक सन्देश मिला| मुझे लगा कि सुरभि की तरह अनेक युवा दोराहे पर खड़े हैं| ऐसे में अपने अनुभव साझा कर रहा हूँ| संभव है, आपके लिए मददगार हो लेकिन पहले सुरभि का सन्देश और फिर मेरी सलाह, सुझाव आदि|

सर, यूट्यूब पर एक वीडियो में आपको स्टूडेंट्स की मदद करते देखा| कृपया मेरी भी मदद करो| मैं बैंकिंग के लिए प्रीपेयर कर रही हूँ। मेरी इनकंसिसटेंसी की वजह से मैं इस एग्जाम को क्लीयर नहीं कर पा रही हूँ| मैं बहुत कन्फ्यूज्ड हूँ सर| मेरी कैलकुलेशन बहुत स्लो है। मैं छोटे से छोटे सवाल भी जुबानी हल नहीं कर पाती हूँ। इकोनोमी न्यूज़ भी थोड़ा-थोड़ा ही समझ आता है। मैं क्या करूँ, कंटीन्यू करूँ कि किसी और लाइन में जाऊं, समझ नहीं आता। सर, मेरा रियल प्राब्लम मेरा कन्फ्यूजन है। मुझे समझ नहीं आता कि मैं क्या करना चाहती हूँ? मेरा इंटरेस्ट कहाँ है? मैं अपना भविष्य कहाँ देखूँ? समझ नहीं आता। सर गाइड करो प्लीज…

यह सवाल मुझे मेल पर एक युवती सुरभि ने भेजा है। उसके सवालों में ही जवाब किसी न किसी रूप में छिपा है। ऐसा मैं इसलिए कह पा रहा हूँ कि जब आप समस्या जान पा रहे हो तो उसी के अनुरूप समाधान तलाशना उचित होगा। अगर आपकी समस्या सुरभि की तरह है तो मेरे कुछ सुझाव हैं। अगर आप बैंकिंग या किसी भी और पद की तैयारी कर रहे हैं और सुरभि की तरह इनकंसिसटेंसी के शिकार हैं तो कृपया इसे छोड़ दें। लगातार, फोकस्ड होकर पढ़ाई करने से ही कोई पद मिलता है, आसानी से नहीं।

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सुरभि बैंकिंग की तैयारी कर रही हैं लेकिन यह बिल्कुल नहीं जान पा रही हैं कि उनके लिए यह उचित है या नहीं। यहाँ मुझे सिर्फ यही कहना है कि जब आप कन्फ्यूज्ड हैं तो तैयारी ठीक से हो ही नहीं सकती। हम पढ़ाई पूरी करने के बाद जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसका उद्देश्य समाज में सिर उठाकर जीने के लिए पैसा, पद और सम्मानजनक जीवन ही होता है| अब अगर आपको पता है कि अमुक दूरी आप तय नहीं कर सकते तो कतई उस रास्ते पर मत जाओ। आप वहीं जाओ, जहाँ आपका मन लगता हो। जो आप कर सकते हो लेकिन ध्यान यह भी रखना होगा कि मंजिल कोई भी आसान नहीं होती। कठिन वही होता है, जो हमें नहीं आता। हर वह सवाल सरल होता है, जो हमें बखूबी आता है।

इसके बावजूद सुरभि की तरह आप कन्फ्यूज्ड हैं तो अब यह दिक्कत दूर करने के ढेरों उपाय हैं। आप छोटी उम्र से लेकर बड़ी क्लास तक में पढ़ते हुए अपनी रूचि जान सकते हैं। लेकिन इसके लिए भी आपको टेस्ट देना होगा। यही टेस्ट आपकी रूचि के अनुसार तय कर देगा कि आपकी रूचि कहाँ है? किस फील्ड के लिए आप तैयारी करोगे तो दिक्कतें कम होंगी। लेकिन एक बहुत महत्व की बात फिर भी है कि इस टेस्ट से जो भी परिणाम निकलेगा, उसके अनुरूप तैयारी आपको ही करनी होगी।

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मम्मी-पापा, भाई, बहन, टीचर, मेरे जैसा कोई भी काउंसलर सिर्फ और सिर्फ आपको रास्ता दिखा सकता है। उस रास्ते पर चलते हुए कामयाबी आपको ही हासिल करनी है। कापी-किताब, स्कूल, कोचिंग सब कुछ घर के लोग दे सकते हैं यहाँ तक कि एग्जाम हाल तक आपको सुविधा से पहुँचा सकते हैं लेकिन पेपर आपको ही देना होगा।

सुरभि या उनके जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसी भी युवा को मेरा सुझाव है कि आप साइकोमेट्रिक टेस्ट कराओ। आपकी रूचि का अंदाजा मिल जाएगा| जब नेहा यह कहती हैं कि इकोनोमिक न्यूज़ बहुत थोड़ा समझ आता है, तब यह साफ़ होता है कि इसमें आपका नहीं, उम्र का दोष है। आप जब यह लिखते हो कि छोटे छोटे सवाल भी आप जुबानी नहीं हल कर पाते हो, इसका मतलब यह है कि आपकी रूचि बिल्कुल नहीं है इन चीजों में।

ऐसे में आपको बैंकिंग की तैयारी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि होश सँभालने के तुरंत बाद से हमारा रिश्ता अर्थशास्त्र से पड़ता है। गणित से पड़ता ही है। जब हम टेम्पो में जाते हैं, बस में जाते हैं, कापी-किताब, पेन्सिल खरीदने जाते हैं, हमें जोड़ घटाना करना ही होता है। फिर भी अगर आपके सामने दिक्कत है तो साइकोमेट्रिक टेस्ट मददगार होगा। उसके बाद रास्ता चुनना आसान हो जाएगा। मेरी बहुत शुभकामनाएँ।

(लेखक सीनियर जर्नलिस्ट, करियर काउंसलर एवं लाइफ कोच हैं)